जानें देवी माता के विभिन्न शक्तिपीठ और उनके महत्व

जानें देवी माता के विभिन्न शक्तिपीठ और उनके महत्व

नवरात्रि का पर्व ‘महाशक्ति’ की उपासना के लिए जाना जाता है. इस दौरान लोग माता के 51 शक्तिपीठों में जाकर आराधना करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. देवी सती के जो अंग जहां-जहां गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठ हैं. आइये हम आपको बताते हैं कि किस शक्तिपीठ में माता का कौन सा अंग गिरा.

सबसे पहले बात करते हैं कश्मीर की, तो यहां के पहलगांव के पास महामाया मंदिर, जहां देवी का कंठ गिरा. हिमाचल के कांगड़ा में ज्वालादेवी मंदिर, यहां माता की जीभ गिरी. हिमाचल के ही बिलासपुर में नैना देवी मंदिर, जहां देवी की आंख गिरी. पंजाब के जालंधर के त्रिपुरमालिनी मंदिर में माता का बायां वक्ष गिरा. इसके अलावा झारखंड में देवघर के वैद्यनाथ मंदिर में ह्रदय, ओडिशा में पुरी के पास विरजा क्षेत्र में नाभि, पश्चिम बंगाल में कटवा के बहुला मंदिर में भुजा, पश्चिम बंगाल के ही जलपाईगुड़ी में स्थित त्रिस्तोत मंदिर में बायां पैर, पश्चिम बंगाल के वर्धमान में स्थित युगाद्या मंदिर में माता के दाएं पैर का अंगूठा गिरा. वहीं असम के गुवाहाटी में स्थित कामाख्या मंदिर में माता का योनि हिस्सा और मध्य प्रदेश में उज्जैन के उज्जयिनी मंदिर में माता की कलाई गिरी.

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