कहीं दूध के लिए तरस न जाएं

कहीं दूध के लिए तरस न जाएं

जलवायु परिवर्तन की वजह से आने वाले वक्त में लोग कहीं दूध के लिए तरस न जाएं,,,ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट के आंकड़े ये बता रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक दूध के उत्पादन में गिरावट की आशंका है और इसका असर अगले एक साल में दिखने लगेगा। जलवायु परिवर्तन के भारतीय कृषि पर प्रभाव संबंधी अध्ययन पर आधारित कृषि मंत्रालय की आंकलन रिपोर्ट के अनुसार,,2020 तक दूध के उत्पादन में 1.6 मीट्रिक टन की कमी आ सकती है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से संबद्ध संसद की प्राक्कलन समिति के प्रतिवेदन में इस रिपोर्ट के हवाले से अनुमान लगाया गया है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण दूध उत्पादन को लेकर अगर सचेत नहीं हुए,, तो 2050 तक यह गिरावट 10 गुना तक बढ़कर 15 मीट्रिक टन हो जायेगी। दुग्ध उत्पादन में सबसे ज्यादा गिरावट उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट में दलील ये दी गई है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण, ये राज्य दिन के समय तेज गर्मी के दायरे में होंगे और इस कारण पानी की उपलब्धता में गिरावट पशुधन की उत्पादकता पर सीधा असर डालेगी।इसके अलावा रिपोर्ट में चावल समेत अन्य कई फसलों के उत्पादन में कमी और किसानों की आजीविका पर असर को लेकर भी आशंका जताई गई है।

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